३ चैत्र, जनकपुरधाम । ए मिथिलाका पावनभुमि जनकपुरधाम है । आज मिथिला माध्यमिकी परिक्रमाका १५ हवाँ दिन भी है । परिक्रमा करनेवाले श्रद्धालु भक्तगण और साधुसन्त लगातार १४ दिनो तक नेपाल भारत सहित १४ स्थानके पडाव स्थल पर बिश्राम करते हुए नेपालका जनकपुरधाम पहुँच चुके है ।
हर साल फाल्गुण माहका अमावश्या तिथिके प्रतिपदाके दिन जनकपुरधाम हनुमानगढीमे एकत्रित होकर बिधिबत रुपसे जनकपुरधामके हनुमानगढीसे शुरु होने वाले ए मिथिला माध्यमिकी परिक्रमाका आज १५ हवाँ दिन है । लगातार १५ दिनोसे नङ्गे पैर और सर पर खाने पिने व ठहरनेके सजो सामान लिए हुए ए श्रद्धालु भक्तगण आज जनकपुरधाम पहुँच ही चुके है ।
महाकुम्भके नाम से भी प्रख्यात ए परिक्रमाकी शुरुवात त्रेतायुग सेही शुरु की गई धार्मिक ग्रन्थोमे उल्लेख है । कहा जाता है की जब श्रीराम चन्द्र एतिहासिक मिथिला नगरीमे पधारे थे उस वक्त वो मिथिला क्षेत्र अर्थात राजा जनकके नगरीकी परिक्रमा किए थे । जहाँ जहाँ पर राम चन्द्र जी अर्थात रघुवर जी के चरण पडे थे उसी मार्ग होते हुए उस दिन से शुरु कि गई परिक्रमा आज भी उसी तरह से श्रद्धालु लोग करते आ रहे है । और सियारामजीका डोलाको आज भी परिक्रमा करा रहे है । जहाँ जहाँ पर रघुवर ने बिश्राम किया था उसी स्थलो पर आज भी श्रद्धालु बिश्राम करते आ रहे है ।
अलग अलग जगहोसे माता सिता और रामका डोलाके साथमे ए परिक्रमाकी शुरुवात की गई थी । पहला दिन कचुरीसे मिथिलाबिहारी जीका डोला और जनकपुरधामसे किशोरी जीका डोलाको परिक्रमामे सामिल कर सियारामको परिक्रमा करवाते हुवे परिक्रमाका शुरुवात किया गया था । और उसके पिछे पिछे श्रद्धालु भक्तजन और साधुसन्त भी परिक्रमाके लिए निकल पडे थे । नेपालके १०७ और भारतके २६ कर कुल १३३ किलोमिटर पैदल यात्रा कर श्रद्धालु आज जनकपुरधाम पहुँच चुके है । ईस दौरान ईन्होने नेपाल भारतके अलग अलग स्थानके कुल १५ स्थानो पर रात्रीकालीन बिश्राम भी करते है ।
इसी तरह दुसरा दिन भारतके कल्ना, तिसरा दिन फुलहर, चौथा दिन नेपालके मठिहानी , पाँचवा दिन जलेश्वर, छठा दिन मडई, सातवा दिन ध्रुवकुण्ड , आठवा दिन कञ्चनवन, नवमा दिन , पर्वता, दशवा दिन धनुषाधाम, ग्यारवहा दिन सतोषर, बारहवा दिन औरही, तेरहवा दिन करुणा, चौधवा दिन बिसौल, और १५ हँवा दिन फिरसे कल्ना होते हुए जनकपुरधाम पहुँच चुके है ।
कहाजाता है कि १५ दिनोका ए कठोर परिक्रमा करनेसे मनोबाँञ्छित मनोकामना पुरी होती है और चारो धाम घुमनेका फल की भी प्राप्ति होती है । परिक्रमा करनेके लिए लोग सर पर साजो सामान और खाली पैर निकलते है । परिक्रमाके दौरान लहसन और प्याज तक खाना बर्जित किया गया है ।
परिक्रमामे निकलनेके लिए लोग अपनी अपनी बैल गाडी व ट्रैक्टरमे १५ दिनोके लिए खाने पिने व सोनेका सामाग्री डाल के निकलते है । हर पडाव पर शिवलिङ स्थापित है । वहाँ पर तलावमे स्नान कर भोलेनाथका शिवलिङ पर जल अर्पित कर सुबह सुबह अगली पडावके लिए श्रद्धालु साधु सन्त लोग निकल पडते है । जहा जहा पडाव पर पहुँचते है वहा वहाँ मेला भी लगता है जो वो भी साथमे चलते है । तो वही स्थानिय लोग भी मेला देखने व मेलेमे सामान बेचनेके लिए भारी सँख्यामे आते है । हर पडाव पर रामलीलाकी प्रदर्शन भी किया जाता है । वही कुछ साधु सन्त अपना कर्तब भि दिखाते है । हर पडाव पर श्रद्धालुओके लिए निःशुल्क खानेपिने और इलाजके वास्ते दवाकी ब्यवस्था भी अलग अलग दाता करते है ।
लगातार १५ दिनो तक श्रीराम नामका जाप करते हुए परिक्रमामे सामिल श्रद्धालु आज जनकपुरधाममे बिश्राम कर रहे है ।
थके हुए श्रद्धालु अपना अपना बिश्रामका बन्दोबस्तमे जुट चुके है । श्रद्धालु भक्तगण छोटा छोटा पण्डाल डालके बिश्राम करते नजर आ रहे है । तो वही कुछ लोग साम होनेके वजहसे खानेपिनेके तयारीमे जुट चुके है । क्योकि कल उन्हे जल्दी अन्र्तगृह परिक्रमाके लिए निकलना भी तो है । इसिलिए ए जल्दीसे खा पि कर बिश्राम करना चाहते है । दुर दुर तक बिश्राम करते नजर आते देख सकते है । बिश्राम स्थलके लिए जनकपुरधामके बारह बिग्हा अर्थात रँगभुमि मैदान और गँगा सागर तलावके पास झुला घर सहित जनकपुरके अलग अलग स्थानो पर श्रद्धालु बिश्राम कर रहे है । मनमे राम नाम का जाप और श्रद्धाके कारण लोग थकान भी भुल चुके है । कुछ लोग बृहत्तरके आयोजनामे हो रही होली कार्यक्रमका आनन्द भी ले रहे है ।
कल अर्थात मध्यरात सेही श्रद्धालु जनकपुरधामकी पवित्र कुण्ड, सरोवरमे स्नान कर शिवजीको जल अर्पित कर जनकपुरधामके अन्र्तगृह परिक्रमा अर्थात जनकपुरधामकी परिक्रमाके लिए निकल पडेङ्गे । वैसे तो १५ दिनो तक परिक्रमामे सामिल होनेके लिए नेपाल भारतके हजारौ साधु सन्त और श्रद्धालु भक्तगण पहुँचते है । मगर कल अर्थात फाल्गुण पुर्णिमाके दिन जब जनकपुरधामका अन्तर्गह परिक्रमा किया जाएगा तब जनकपुर सहित ईसके आसपासका लोगोका सँख्या भी बढ जाएगा । कल होने वाले सिर्फ अन्र्तगृह परिक्रमा करनेके लिए भि फिर और हजारौके सँख्यामे श्रद्धालुओका भिड बढेगा । और ए सँख्या लाखौमे चला जाएगा । कल सोलहवा दिन फाल्गुण पुर्णिमाके दिन फिर जनकपुरधामके अन्र्तगृह परिक्रमका करनेके बाद ही ईस परिक्रमाका बिधिवत रुपसे समाप्ति मानी जाएगी । कल ए परिक्रमाके समाप्ति कर श्रद्धालु भक्तगण राम मन्दिर और जानकी मन्दिरमे दर्शन भी करेङ्गे । उस पश्चात परिक्रमाकी समाप्ति होगी । इसी तरहसे फिर अगले साल परिक्रमा होगी और फिर इसी तरहसे लाखौके तादादमे लोग सामिल होङ्गे ।
